
नई दिल्ली । बीजेपी और आरएसएस के रिश्ते फिर से मजबूत हो रहे हैं। हाल ही में पीएम मोदी के नागपुर दौरे और संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात के बाद साफ हो गया कि बीजेपी के लिए संघ से करीबी होना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट में बताया गया हैं कि 11 साल बाद आरएसएस मुख्यालय पहुंचे पीएम मोदी की यह यात्रा इसका संकेत है कि बीजेपी के लिए संघ का साथ कितना अहम है। इस मुलाकात में दोनों पक्षों के बीच पुराने मतभेदों को दूर करने और भविष्य में एकसाथ काम करने पर सहमति बनी। यह घटना पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रमोद महाजन के उस बयान को सच करती है, इसमें उन्होंने 21 साल पहले कहा था कि बीजेपी में असली ताकत का फैसला संघ ही करता है। दरअसल 2004 में बीजेपी नेता महाजन ने पत्रकारों के एक सवाल का जवाब देकर कहा था, जो संघ तय करेगा, वहीं पार्टी में महत्वपूर्ण होगा। तब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार अप्रत्याशित हार के बाद सत्ता से बाहर हो गई थी।इसके बाद संघ ने पूर्व उपप्रधान मंत्री लालकृष्ण आडवाणी को मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ करने के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला किया, जिससे उनका राजनीतिक ग्राफ नीचे चला गया। वहीं, नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ, जो तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे। भागवत और नरेंद्र मोदी, दोनों का पुराना रिश्ता है। दोनों हम उम्र भी हैं। इस साल सितंबर में दोनों 75 साल के हो जाएंगे। भागवत ने 2013 में मोदी को बीजेपी के पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। मोदी की पहली जीत के बाद उनके मंत्रिमंडल और आरएसएस नेताओं के बीच नियमित बैठकें होती थीं। हालांकि, हाल के वर्षों में दोनों संगठनों के बीच तनाव की खबरें भी सामने आई थीं। 2024 के चुनावों में बीजेपी को 240 सीटें मिलीं, जो बहुमत से कम थीं, और संघ के समर्थन में कमी को इसका कारण माना गया। मोदी की हालिया नागपुर यात्रा को सुलह का प्रतीक बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह मुलाकात पहले से तय थी और इसका मकसद बीजेपी-संघ के रिश्तों को मजबूत करना था। पीएम ने कहा, मैं एक स्वयंसेवक हूं और संघ के सामने झुकता हूं। भागवत के साथ उनकी 20 मिनट की निजी बैठक के बाद दोनों हेडगेवार स्मृति मंदिर में नजर आए। मोदी ने आरएसएस को अक्षयवट वृक्ष करार देकर राष्ट्रीय संस्कृति का आधार बताया।
