
नई दिल्ली । 32 साल के सियासी इतिहास में दिल्ली को 6 मुख्यमंत्री मिले हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की है और राजधानी की सत्ता में उसकी 27 साल बाद वापसी हुई है। अब नए मुख्यमंत्री को लेकर बीजेपी में लगातार मंथन चल रहा है। बीजेपी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो राजधानी के सियासी मिजाज में फिट बैठ सके। साथ ही ब्रांड केजरीवाल को टक्कर दे सके। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हुए पांच दिन हो गए हैं। मगर, बीजेपी अपने नए सीएम के नाम पर मुहर नहीं लगा सकी। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद दिल्ली का अगला सीएम कौन होगा, इसे लेकर बीजेपी में बैठकों का दौर जारी है। 16 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक में ही नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल हो जाएगा लेकिन बीजेपी को ऐसे चेहरे की तलाश है, जो दिल्ली के सियासी मिजाज में फिट बैठता हो और ब्रांड केजरीवाल को सियासी टक्कर दे सके। दिल्ली के नए मुख्यमंत्री को लेकर बीजेपी में लगातार मंथन चल रहा है। बीजेपी की इच्छा है कि दिल्ली में किसी धाकड़ चेहरे को मुख्यमंत्री के लिए चुना जाए, जिसका अपना सियासी मर्तबा और राजनीतिक रसूख भी हो। दिल्ली में बीजेपी की सरकार रही हो या फिर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की, लेकिन सत्ता की बागडोर हमेशा ऐसे नेता के हाथ में रही है, जिसका सियासी कद ऊंचा रहा है। ऐसे में अब देखना है कि बीजेपी अपना नया सीएम किसे चुनती है? 32 साल के सियासी इतिहास में दिल्ली को छह मुख्यमंत्री मिले हैं। केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में पहली बार 1993 में विधानसभा चुनाव हुए थे। बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी थी तो सत्ता का ताज बीजेपी के दिग्गज नेता मदनलाल खुराना के सिर सजा था। 1993 से लेकर 1998 के बीच यानी पांच साल में बीजेपी ने तीन सीएम बनाए थे, जिसमें मदनलाल खुराना से लेकर साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज के नाम शामिल हैं। इसके बाद कांग्रेस की सरकार बनी और दिल्ली की सत्ता पर 15 साल तक काबिज रही तो सत्ता की बागडोर शीला दीक्षित के हाथों में रही।
