
मुंबई,। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत के कारण अब महायुति में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ही दो दल बचे हैं। इस बीच एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है जो भाजपा और शिवसेना के बीच दरार का संकेत देती है। खबर है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राज्य की आपदा प्रबंधन समिति से बाहर कर दिया गया है। यह समिति जुलाई 2005 में मुंबई में आई बाढ़ के बाद गठित की गई थी। आपातकालीन स्थितियों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह समिति संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय का काम करती है। मुख्यमंत्री इस समिति के पदेन अध्यक्ष हैं। इसलिए अब जब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बन गए हैं तो इस समिति का नेतृत्व देवेंद्र फडणवीस को सौंप दिया गया है। इस नई समिति में उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भी जगह दी गई है। अब इस समिति से एकनाथ शिंदे को बाहर रखे जाने पर राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा तेज हो गई है कि शिवसेना-भाजपा के बीच अंदरूनी कलह चल रहा है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली नई आपदा प्रबंधन समिति में अजित पवार के साथ राजस्व, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य मंत्री शामिल हैं। वहीं इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है कि राज्य के शहरी विकास मंत्री होने के बावजूद एकनाथ शिंदे को आपदा प्रबंधन समिति से बाहर रखा गया है। आपदा प्रबंधन में शहरी विकास विभाग की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहती है। इस विभाग के मंत्रियों और अधिकारियों के माध्यम से संबंधित घटना स्थल पर प्रणाली और सहायता पहुंचाई जाती है। फिर भी, आपदा प्रबंधन समिति में एकनाथ शिंदे को शामिल न किए जाने से विवाद छिड़ गया है। सरकार अब इस पर स्पष्टीकरण या तर्क प्रस्तुत करेगी। वहीं सूत्रों की मानें तो देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच अंदरूनी कलह ही इस सब के पीछे की वजह है। दरअसल पिछले कुछ समय से एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच मतभेद की चर्चा चल रही है। राज्य में महायुति सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच होड़ मची थी। दोनों के बीच कई मुद्दों पर आंतरिक संघर्ष की बातें सामने आईं। हाल ही में शिवसेना और भाजपा के बीच पालकमंत्री पद के बंटवारे को लेकर टकराव हुआ था। यह संघर्ष इतना चरम पर पहुंच गया कि रायगढ़ और नासिक के पालक मंत्रियों की घोषित नियुक्ति स्थगित कर दी गई।
