
लखनऊ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि महाकुम्भ में असुविधाओं को आचोलना न समझा जाए। आस्थापूर्ण सुझाव है कि तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किये जाए। भाजपा सरकार महाकुम्भ को आत्म-प्रचार का स्थान न मानकर, सेवाभाव से देखे अखिलेश यादव ने मंगलवार को जारी बयान में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ में लोग नहीं व्यवस्था अतिविशिष्ट होनी चाहिए। मेला क्षेत्र में वीआईपी लोगों के आने से वन-वे किये जाने की वजह से तीर्थयात्रियों को समस्या हो रही है, वो नहीं होनी चाहिए। सरकार पिकअप-ड्राप के लिए बसें चलाए। अव्यवस्था सिर्फ श्रद्धालुओं को ही नहीं महाकुम्भ प्रशासन और प्रबंधन में दिन रात लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को भी थका रही है। अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रति भी मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाए, उनके उचित विश्राम व भोजन-पानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, जिससे व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। महाकुंभ का बजट 10 हजार करोड़ रूपये है। इस बजट में जो सुविधाएं होनी चाहिए थी वह सुविधाएं नहीं है। जो गरीब लोग आ रहे हैं उनको ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं सरकार दे। महाकुम्भ में वीआई मूवमेंट के समय जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए। लोगों को लम्बी दूरी तक पैदल चलाना पड़ रहा है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की जितनी भारी भीड़ है उसके हिसाब से शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। जो शौचालय हैं भी उनमें पानी की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा कि महाकुम्भ में संकल्प लेना चाहिए कि हमें जो जीवन मिला है वो अलग-अलग दिशाओं से आती हुई धाराओं के मिलन से ही अपना सही अर्थ और मायने पा सकता है। हमें संगम की तरह जीवन भर मेलजोल का सकारात्मक संदेश देना चाहिए। सद्भाव, सौहार्द और सहनशीलता की त्रिवेणी का संगम जब-जब व्यक्ति के अंदर होगा तब-तब हम सब महाकुम्भ का अनुभव करेंगे।
