
–अभिषेक प्रकाश (संपादक)
गौतम बुद्ध नगर के दादरी से समाजवादी पार्टी ने चुनावी सफर की शुरुआत क्यों करी ये विश्लेषकों का बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, खास कर की तब जब समाजवादी पार्टी के लिए नोएडा और दादरी का क्षेत्र कमज़ोर कड़ी रहा है
गौरतलब है की समाजवादी पार्टी यहां से कभी चुनाव नही जीती। यहां की सीट अधिकतर भाजपा या बसपा जीतती रही है।
मिहिर भोज मैदान का रैली स्थल के रूप में चुनाव करना तथा राजकुमार भाटी को आगे करना गुर्जर बोटबैंक को साधने के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से जब गौतम बुद्ध नगर जिले की तीनों विधान सभाओं में से दादरी अकेली विधान सभा है जहां गुर्जर निर्णायक भूमिका में हैं। बाकी जेवर में राजपूत और नोएडा सदर में शहरी सोसाइटी मतदाता निर्णायक है।
ध्यान देने वाली बात ये भी है कि राजकुमार भाटी बड़े समाजवादी नेता है पर क्या बड़े गुर्जर नेता भी है ये चर्चा का विषय इसलिए भी है कि दादरी गुर्जर बहुल होते हुए तथा राजकुमार भाटी खुद दादरी से होते हुए भी दादरी से चुनाव नही जीते। यहांतक की यूपी के 2012 चुनाव में जब अखिलेश की लहर चली थी पर दादरी मात्र 11 प्रतिशत वोट के साथ चौथे नंबर पे रहे थे।
ऐसे में समाजवादी पार्टी का यहां से चुनावी शंखनाद करना कई सवाल खड़े करता है। अखिलेश संभवतः पश्चिम यूपी में अपनी ज़मीन मज़बूत करना चाहते हैं, विशेष रूप से तब जब रालोद भाजपा के साथ गठबंधन में है और सवर्ण + जाट के मज़बूत समीकरण के सामने टिकने के लिए मुस्लिम यादव के अपने पारम्परिक समीकरण में गुर्जर को जोड़ना चाहते हैं।
