
–Abhishek Prakash
उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठन बनाम सरकार की लड़ाई कोई पहली बार नही है
कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल मे भी ये स्थिति रह चुकी है, उस काल मे केंद्रीय नेतृत्व की लड़ाई यूपी में केंद्र के योद्धा के रूप में प्रदेश अध्यक्ष राजनाथ सिंह लड़ रहे थे |राजनाथ सिंह खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे लेकिन कल्याण सिंह ने ठाकुर लॉबी को ओबीसी के खिलाफ निशाना बनाया था।
यूपी में केंद्र बनाम संगठन: कमोबेश यूपी में आज भी ठाकुर बनाम ओबीसी की झलक दिख रही है बस किरदार उलट गए हैं, अब केन्दीय नेतृत्व का योद्धा प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी है और लोकप्रियता के कमान से प्रत्यंचा चढ़ाने के प्रयास करता हुआ मुख्यमंत्री ठाकुर है
ठाकुर समाज का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि मोदी काल में उनके राजनीतिक वर्चस्व को कमतर करने की कोशिश की गई है। इसके प्रमाण के रूप में गाजियाबाद लोकसभा सीट पर स्थापित परंपरा को तोड़कर वैश्य समाज के अतुल गर्ग को टिकट देकर विजयी बनाने और राजस्थान व अन्य हिंदी राज्यों में स्थापित क्षत्रिय नेतृत्व को कमजोर करने के फैसलों को देखा जा रहा है।
हालांकि वर्तमान में ये केंद्र बनाम योगी 1999 के ऐतिहासिक ‘राजनाथ बनाम कल्याण सिंह’ विवाद जितना खुलकर सामने नहीं आया है। तब कल्याण सिंह जनप्रिय नेता होने के साथ-साथ अधिकांश विधायकों के निर्विवाद नेता थे, जबकि सीएम योगी के साथ विधायकों का वह समीकरण दिखाई नहीं देता। इसके बाद भी, प्रशासनिक तंत्र पर मजबूत पकड़ व प्रचारतंत्र की शक्ति के साथ योगी जी इस सियासी मुकाबले में मजबूती से डटे हुए हैं।
वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में जब यूपी में सीटें कम हुईं, तभी कल्याण सिंह को पद से हटाने की पटकथा लिखनी शुरू हुई थी। अब कई दिग्गजों का भविष्य, वर्तमान में अतीत की इस पुनरावृत्ति होने न होने पे निर्भर है |
