
जामनगर । दुनिया में मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी 180 किमी की पदयात्रा पर निकले हैं। वे हर रोज 6 से 7 घंटे पैदल चलते हैं और प्रतिदिन 20 किमी की दूरी तय करते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि अनंत अंबानी अपने 30वें जन्मदिन से एक दिन पहले 8 अप्रैल तक पावन शहर द्वारकीधीश पहुंच सकते हैं। यह कोई सेरेमोनियल मार्च यानी दिखावे वाली यात्रा नहीं है। यह तो बस शुद्ध भक्ति है। शरीर, मन और आत्मा को भगवान कृष्ण को समर्पित कर देना। हर कदम के साथ भारत के सबसे अमीर परिवार के वंशज अनंत अंबानी द्वारकाधीश की कृपा और सनातन धर्म के आदर्शों में खुद को लीन कर देते हैं। उनका ये चलना किसी को दिखाने के लिए नहीं है। ये तो शांति, एकांत और तपस्या में ईश्वर को खोजने का एक तरीका है। इस यात्रा को और भी असाधारण बनाता है अनंत का जज्बा। वह कुशिंग सिंड्रोम (एक दुर्लभ हार्मोनल बीमारी) और मोटापे से जूझते हुए ये यात्रा कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्हें बचपन से ही अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारी भी है। उनकी ये पदयात्रा किसी को भी हिला कर रख दे, लेकिन अनंत के लिए ये यात्रा ताकत दिखाने के लिए नहीं है। उनके लिए ये आस्था को डर से ऊपर रखने, तकलीफ से बढ़कर भक्ति और आराम से बढ़कर अनुशासन का प्रतीक है।
