
मुंबई । बालीवुड फिल्म निर्माता उमेश बिष्ट द्वारा निर्देशित ‘पगलैट’ फिल्म ने न केवल शोक और दुःख को लेकर समाज की पारंपरिक सोच को बदला, बल्कि अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा को अपनी पीढ़ी की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में भी स्थापित किया। ‘पगलैट’ की कहानी एक युवा विधवा संध्या की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है, जो अपने पति की मृत्यु के बाद समाज द्वारा तय किए गए शोक के नियमों से खुद को अलग पाती है। सान्या ने इस किरदार में संवेदनशीलता और आत्म-खोज के बीच की जटिलता को बखूबी उकेरा। यह फिल्म हमारे समाज में प्रचलित उस धारणा को तोड़ती है कि महिलाएँ केवल भावनात्मक रूप से कमजोर होती हैं। इसके बजाय, यह महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता की एक नई परिभाषा गढ़ती है। ‘पगलैट’ की सफलता के बाद सान्या मल्होत्रा के करियर को नई ऊँचाइयाँ मिलीं। उनकी हालिया फिल्म ‘मिसेज’ ने एक बार फिर साबित किया कि वह जटिल और गहन कहानियों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उनके आगामी प्रोजेक्ट्स, जैसे कि ‘सनी संसकारी की तुलसी कुमारी’ (धर्मा प्रोडक्शंस) और अनुराग कश्यप व बॉबी देओल के साथ उनका रोमांचक सहयोग, इस बात का संकेत देते हैं कि सान्या लगातार अपनी सीमाओं को आगे बढ़ा रही हैं और भारतीय सिनेमा में सबसे बेखौफ अभिनेत्रियों में से एक बनी हुई हैं। ‘पगलैट’ के चार साल बाद भी यह फिल्म सान्या के करियर का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनी हुई है। यह न केवल उनकी बेहतरीन अदाकारी को दर्शाती है, बल्कि भारतीय सिनेमा में महिला-प्रधान फिल्मों की बढ़ती ताकत का भी प्रतीक है। सान्या ने इस फिल्म के जरिए यह साबित कर दिया कि वह अपनी दमदार प्रस्तुति और सशक्त किरदारों के साथ लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली हैं। बता दें कि बॉलीवुड अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा ने हमेशा ऐसी भूमिकाएँ निभाई हैं जो परंपरागत धारणाओं को चुनौती देती हैं और सार्थक चर्चाओं को जन्म देती हैं। उनकी समीक्षकों द्वारा सराही गई फिल्म ‘पगलैट’ अपनी चौथी वर्षगांठ मना रही है, और यह फिल्म इस बात का प्रमाण है कि सान्या अपने हर किरदार में गहराई और प्रामाणिकता लाने में कितनी सक्षम हैं।
