
ओमान की खाडी में होने जा रहा संयुक्त नौसैनिक अभ्यास
चाबहार,। ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए खास है। भारत इस ईरानी पोर्ट को अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए विकसित कर रहा है। चाबहार पोर्ट इन दिनों फिर सुर्खियों में है। इस पोर्ट के पास ही ओमान की खाड़ी में एक अहम संयुक्त नौसैनिक अभ्यास होने जा रहा है। इस अभ्यास में चीन, ईरान और रूस के नौसेना समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। यह अभ्यास ऐसे वक्त हो रहा है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की धमकी दी है और चीन पर ईरान और उत्तर कोरिया को मदद देने के आरोपों के साथ नए प्रतिबंध लगाने की बात कही है। इस परिस्थिति में, चीन, रूस और ईरान के बीच हो रहे इस अभ्यास को लेकर वैश्विक रणनीतिक विश्लेषकों की चिंता जताई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि ईरान आखिर चीन और रूस के साथ मिलकर क्या रणनीति बना रहा है? चाबहार पोर्ट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ और भारतीय महासागर के बीच स्थित है। यह एक समुद्री रास्ता है, जो कच्चे तेल की शिपिंग के लिए अहम है। इस लिहाज से, इस क्षेत्र में चीन, रूस और ईरान का सैन्य समागम वैश्विक सुरक्षा के संदर्भ में एक नई रणनीति का संकेत हो सकता है। चीन ने इस अभ्यास के लिए अपनी नौसेना के 47वें एस्कॉर्ट टास्क ग्रुप से बाओटौ नामक विध्वंसक और गाओयूहू नामक आपूर्ति जहाज भेजने का फैसला लिया है। बाओटौ एक गाइडेड मिसाइल विध्वंसक है, जबकि गाओयूहू आपूर्ति जहाज है। चीनी रक्षा मंत्रालय ने इस अभ्यास के उद्देश्य को ऊर्जा शिपिंग मार्गों की सुरक्षा में मदद करना बताया है, जो खाड़ी के अहम जलमार्गों के लिए जरूरी है। यह अभ्यास चीन, रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग और आपसी विश्वास को और गहरा करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास 2019 के बाद इन देशों के बीच पांचवां संयुक्त नौसैनिक अभ्यास होगा, जो उनके बीच बढ़ते सैन्य संबंधों को दर्शाता है। हालांकि, इस अभ्यास में ईरान ने अभी तक अपनी नौसेना के कौन से जहाज भेजेगा, इस बारे में कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन यह संभावना है कि शाहिद भगेरी ड्रोन कैरियर इस अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज करा सकता है। चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। भारत इसे अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए विकसित कर रहा है। भारत ने मई 2015 में चाबहार पोर्ट के विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और फिर मई 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ, जिसे चाबहार समझौते के रूप में जाना जाता है। यह पोर्ट भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है, जिससे पाकिस्तान पर निर्भरता कम होती है। इसके अलावा यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का एक अहम हिस्सा है, जो भारत, ईरान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप को सड़क, रेल और समुद्री मार्गों से जोड़ता है। इससे व्यापार मार्गों में विविधता आएगी और भारत के आर्थिक हित मजबूत होंगे।
