
पाकिस्तान ने कहा- झूठे दावे करने से बाज आएं
जम्मू,। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए पूछा, आखिर किसने उन्हें रोका है? दरअसल लंदन के चाथम हाउस थिंक टैंक में एक सवाल-जवाब सत्र के दौरान एस. जयशंकर ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे का समाधान तभी संभव होगा जब पाकिस्तान पीओके से पीछे हटे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कश्मीर को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें अनुच्छेद 370 का हटाया जाना पहला कदम था। इस दौरान जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा, कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे में जो हिस्सा है, जब वह वापस आएगा, तो कश्मीर का मुद्दा हल हो जाएगा। इस मामले पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा, यदि केंद्र सरकार में पीओके को वापस लेने की क्षमता है, तो वे इस दिशा में कदम क्यों नहीं उठाते? हमने कभी उन्हें रोका नहीं है। कारगिल युद्ध के दौरान उनके पास हाजी पीर दर्रा वापस लेने का मौका था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। यदि वे सच में इसे वापस ला सकते हैं, तो अब कर के दिखाएं। आखिर ऐसा करने से उन्हें रोका किसने है? इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा चीन के कब्जे में भी है, लेकिन इस पर कोई चर्चा क्यों नहीं करता? भाजपा ने दी तीखी प्रतिक्रिया भाजपा नेताओं ने उमर अब्दुल्ला के बयान पर पलटवार किया और उन्हें घेरने की कोशिश की है। भाजपा नेता सुनील शर्मा ने कहा कि उमर अब्दुल्ला को विधानसभा में स्थानीय मुद्दों का जवाब देना चाहिए था, न कि जयशंकर के बयान पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में अक्साई चिन और पीओके दोनों वापस लिए जाएंगे। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया जयशंकर के बयान पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा कि: भारत को झूठे दावे करने के बजाय अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को खाली करना चाहिए। पीओके पाकिस्तान का हिस्सा है और रहेगा। पीओके को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से तनाव बना हुआ है। भारत इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि पाकिस्तान इसे ‘आजाद कश्मीर’ बताता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी रहती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसे वापस लेने की कोई ठोस रणनीति अभी तक सामने नहीं आई है।
