
कीव । यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बारे में जो ये बात कही है उसमें काफी हद तक सच्चाई भी दिखती है। 1990 के दशक में शीत युद्ध खत्म होने और सोवियत संघ की जगह रूस के निर्माण के बाद से कई ऐसे मौके आए हैं जब यह स्पष्ट हुआ है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी दूध के धुले नहीं हैं। रूस यूक्रेन जंग के तीन साल हो चुके हैं। दुनिया भर में इस युद्ध को समाप्त कराने के तरीके पर चर्चा हो रही है। कुछ जानकारों का तर्क है कि यूक्रेन यह युद्ध जीत नहीं सकता। कुछ का कहना है कि यूक्रेन को दी जा रही अमेरिकी और पश्चिमी देशों की सहायता बहुत महंगी है। युद्ध विराम ही नहीं कई अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों को रूस ठेंगा दिखा चुका है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2, धारा 4 में कहा गया है कि सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी से बचेंगे। रूस ने इसका बार-बार उल्लंघन किया है। 2008 में जॉर्जिया पर आक्रमण किया। फिर 2014 और 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण किया। युद्धविराम तोड़ने और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के चार्टर का उल्लंघन करने के अलावा रूस ने कई अंतरराष्ट्रीय संधियों का भी उल्लंघन किया है। उदाहरण के लिए रूसी ने 2023 में न्यू स्टार्ट संधि का उल्लंघन किया था, जब उसने परमाणु हथियारों के ऑन-साइट निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
