
नई दिल्ली । बसंत ऋतु का मौसम संक्रमण की संभावना को बढ़ा देता है, जिससे सर्दी, खांसी, बुखार और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम में सबसे ज्यादा असर हमारे श्वसन तंत्र पर पड़ता है। इस दौरान इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे व्यक्ति जल्दी बीमार पड़ सकता है। इस खतरे से बचने के लिए योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद साबित हो सकता है। नियमित योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भस्त्रिका जैसे योगासन फेफड़ों को मजबूत करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, शरीर को हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ दिनभर में कम से कम सात से आठ गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं। पानी न केवल शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है, बल्कि विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक होता है। गुनगुना पानी पीने से गले की खराश, कफ और बंद नाक की समस्या से राहत मिलती है। बदलते मौसम में खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए। अदरक, तुलसी, शहद और हल्दी जैसे प्राकृतिक तत्वों को आहार में शामिल करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हर्बल टी का सेवन करने से भी गले की खराश और सर्दी-जुकाम में राहत मिलती है। तुलसी-अदरक की चाय इस मौसम में बेहद फायदेमंद मानी जाती है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत होती है, क्योंकि बदलते मौसम का असर उन पर जल्दी होता है। ठंडी और गर्म चीजों के संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है। हल्के गर्म कपड़े पहनें और बाहर से घर लौटने के बाद हाथ-पैर धोना न भूलें। यदि किसी को लगातार बुखार, सिरदर्द, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना ही बेहतर होता है। बता दें कि बसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। सुबह और शाम हल्की ठंडक महसूस होती है, जबकि दोपहर की तेज धूप गर्मी का एहसास कराने लगी है।
