
नई दिल्ली,। भारतीय सेना को हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) एमके-1ए मिलने में देरी का मुद्दा इन दिनों गरमाया है। अब रक्षा मंत्रालय ने इसके उत्पादन और आपूर्ति में देरी को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने कुछ दिन पहले एलसीए विमानों की डिलीवरी में देरी का मामला उठाया था। बीते दिनों ऑपरेशनल स्क्वाड्रनों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। ऐसी स्थिति में भारतीय वायुसेना अपने को मजबूत करना चाहती है। आईएएफ को अपने लड़ाकू स्क्वाड्रनों की ताकत में बढोतरी के लिए हल्के लड़ाकू विमानों की जरूरत है। इसीलिए ऐसे 83 विमानों का ऑर्डर दिया जा चुका है। रक्षा सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन हुआ है। इन्हें एलसीए कार्यक्रम में अड़चनों की पहचान करने और उत्पादन में तेजी लाने के उपाए बताने होंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि पैनल को अपनी रिपोर्ट एक महीने के अंदर सौंपनी होगी। क्या विमान निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाया जाएगा? मौजूदा हालात में यह अहम सवाल है। जानकारों का मानना है कि ऐसा करके विमानों की डिलीवरी में तेजी लाई जा सकती है। इसकी क्या प्रक्रिया होगी और किन कंपनियों को मौका मिलेगा? समिति के सदस्य इन सवालों के जवाब देने की कोशिश कर सकते हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने बीते दिनों आश्वासन दिया था कि वह जल्द भारतीय वायुसेना को विमान की आपूर्ति शुरू कर देगा और तकनीकी दिक्कतें दूर हो गई हैं। एचएएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ने कहा कि देरी केवल उद्योग में सुस्ती के कारण नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी दिक्कतें थीं, जिन्हें सुलझा लिया गया है। इसको लेकर कई स्तरों पर बैठकें हो चुकी हैं और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम एचएएल जल्द विमान की आपूर्ति करेगा। यह प्रतिक्रिया वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल के बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने भारतीय वायुसेना को तेजस की आपूर्ति में देरी पर चिंता जताई थी।
