
काबुल । भारत जल्द ही अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान के राजदूत स्तर के प्रतिनिधि को नई दिल्ली आने की इजाजत दे सकता है। लेकिन आधिकारिक तौर पर तालिबानी अधिकारी को राजनयिक के रूप में मान्यता नहीं देगा। तालिबान सरकार दिल्ली में अफगान दूतावास की देखरेख के लिए फिलहाल दो नामों पर विचार कर रही है। इनमें से एक नाम फाइनल करते हुए जल्दी ही उनको भारत भेजा जाएगा। तालिबान के प्रतिनिधि को दूतावास, आधिकारिक कार्यक्रम और राजनयिक वाहनों पर अपना झंडा लगाने की अनुमति नहीं होगी लेकिन तालिबान का यह नुमाइंदा भारत में अफगानिस्तान का शीर्ष प्रतिनिधि होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि दोहा में अफगान दूतावास में तैनात नजीब शाहीन नई दिल्ली में शीर्ष पद के लिए प्रमुख दावेदार हैं। शाहीन एक दशक से तालिबान के साथ काम कर रहे हैं और कतर में तालिबान शासन के राजदूत के बेटे हैं। एक अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि शौकत अहमदजई भी इस रेस में हैं, जो तालिबान के विदेश मंत्रालय शीर्ष पद में काम करते हैं। दोनों नामों पर विचार चल रहा है। साल 2021 में तालिबान के काबुल पर कब्जा करने के बाद ज्यादातर देशों ने अफगानिस्तान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे। इनमें भारत भी शामिल था। भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद करते हुए काबुल से संपर्क कम कर दिया था। चीन, पाकिस्तान और रूस जैसे कुछ ही देशों ने ही अभी तक तालिबानी राजनयिकों को स्वीकार किया है। इसकी वजह ये है कि तालिबान को खासतौर से महिलाओं के अधिकारों लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा है। तालिबान ने हाल ही में अफगान नागरिकों को कांसुलर सेवाओं में सहायता करने के लिए मुंबई में एक प्रशासक भी भेजा है। यह भारत और तालिबान के बीच संबंधों में सुधार और क्षेत्रीय राजनीति में बदलाव को दिखाता है। भारत की कोशिश अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति बढ़ाकर वहां चीन के प्रभाव को रोकने की है। तालिबान भी भारत के साथ संबंध सुधारने में उत्सुक दिखा है।
