
सरकारी गोपनीय दस्तावेजों को लीक होने से बचाने का दिया हवाला
वाशिंगटन । अमेरिका की ट्रंप सरकार शुरुआत से ही एक्शन मोड में है। अवैध प्रवासियों से लेकर ड्रग तस्करी और टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन काफी सख्त दिख रहा है। इस बीच अब खबर है कि गोपनीय फाइलों को लीक होने से बचाने के लिए ट्रंप सरकार पॉलीग्राफ टेस्ट का सहारा लेने जा रही है। इसके लिए अमेरिकी गृह मंत्रालय ने कर्मचारियों को चेतावनी देकर कहा है कि सरकारी गोपनीय दस्तावेजों को लीक होने से बचाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट की मदद ली जाएगी। ट्रंप सरकार में गृहमंत्री क्रिस्टी नोएम ने कहा कि कर्मचारियों को हर कीमत पर पॉलीग्राफ टेस्ट से गुजरना पड़ेगा। गृह मंत्रालय की असिस्टेंट सेक्रेटरी ट्रिसिया मैकलॉफलिन ने इस योजना की पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी है। क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट? पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान देखा जाता है कि सवालों के जवाब देते समय क्या इंसान झूठ बोल रहा है या सच। इंसान जब भी झूठ बोलता है, तब उसका हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, बदलता है। इतना ही नहीं उस शख्स को पसीना आता है। कई बार पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान हाथ-पैर के मूवमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है। हालांकि पॉलीग्राफ मशीन पर टेस्ट के दौरान आमतौर पर चार चीजें देखी जाती हैं। कैसे काम करता है पॉलीग्राफ टेस्ट? पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान मशीन के चार या छह प्वाइंट्स को इंसान के सीने, उंगलियों से जोड़ा जाता है। फिर उससे पहले कुछ सामान्य सवाल पूछते हैं। इसके बाद उससे अपराध से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं। इस दौरान मशीन के स्क्रीन पर इंसान की हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, नाड़ी आदि पर नजर रखी जाती है। टेस्ट से पहले भी इंसान का मेडिकल टेस्ट किया जाता है। तब उसके सामान्य हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, नाड़ी दर आदि को नोट किया जाता है। जवाब देने वाला शख्स अगर झूठ बोलता है, तब उसका हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, नाड़ी दर घटता या बढ़ता है। माथे पर या हथेलियों पर पसीना आने लगता है। इससे पता चलता है कि इंसान झूठ बोल रहा है। हर सवाल के समय इन सिग्नलों को रिकॉर्ड किया जाता है। लेकिन अगर इंसान सच बोल रहा होता है, तब उसकी ये सभी शारीरिक गतिविधियां सामान्य रहती हैं।
