
कीमतें छू रही आसमान, यूनुस सरकार ने कहा-जल्द निकालेंगे समाधान
ढाका । बांग्लादेश में इस्लाम के सबसे पवित्र माह रमजान से पहले ही कई जरूरी चीजों की किल्लत हो गई है। लोगों को फूड ऑयल की कमी का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ रहा है। खाने के तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का कहना है कि यह परेशानी अस्थायी है। इसका समाधान जल्द कर लिया जाएगा। बांग्लादेश में जब से मोहम्मद यूनुस ने कार्यवाहक पीएम के रूप में पद संभाला है, स्थिति और गंभीर हो गई है। पिछले साल बांग्लादेश में संकट के बाद शेख हसीना ने पीएम पद छोड़कर भारत आ गई थीं। शेख हसीना के बाद मोहम्मद यूनुस कार्यवाहक पीएम बन गए थे, लेकिन अब स्थिति उनसे संभल नहीं रही है। बांग्लादेश की ऑयल इंडस्ट्री का कहना है कि आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच खाद्य तेल की कीमतें बढ़ी हैं। रिटेलर्स और रिफाइनर्स का कहना है कि ड्रिस्ट्रीब्यूटर तेल की जमाखोरी कर रहे हैं और उसकी आपूर्ति नहीं कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश की सीमा पार फूड ऑयल की तस्करी की जा रही है। वह इसलिए क्योंकि पड़ोसी देशों में इसकी कीमत ज्यादा मिल रही है। बांग्लादेश में पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। यहां बिना ब्रांड वाला सोयाबीन तेल 170 से 175 टका बिक रहा है। वहीं ब्रांड वाले तेल की कीमत 175 से 178 टका प्रति लीटर है। बांग्लादेश का एक टका भारत के 72 पैसे के बराबर है। बांग्लादेश ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (टीसीबी) के मुताबिक पिछले हाल ही में खुले सोयाबीन तेल की कीमतों में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के साथ यह 180 टका प्रति लीटर से बढ़कर 182 टका प्रति लीटर हो गई है। घरेलू आपूर्ति पूरी करने के लिए बांग्लादेश सरकार ने चावल भूसी के तेल के निर्यात पर 25 फीसदी नियामक शुल्क लगाया है। इसके बाद भी स्थिति कंट्रोल में नहीं आ रही है। इंडस्ट्री के मुताबिक सरकार के हस्तक्षेप के बावजूद चावल भूसी के तेल पर शुल्क से व्यापक संकट में कोई खास अंतर नहीं आएगा। चिंता सोयाबीन और पाम तेल को लेकर है। बांग्लादेश में सालाना खाद्य तेल की मांग 2.3 से 2.4 मिलियन टन है। यह रमजान के महीने में बढ़कर 3 मिलियन टन हो जाती है। रिफाइनरी कंपनियों के मुताबिक फूड ऑयल की आपूर्ति में पिछले कुछ महीनों की तुलना में तेजी आई है।
