
वॉशिंगटन । सौरमंडल की सबसे तेज हवाओं की बात करें तो यह नेपच्यून ग्रह पर बहती हैं। इनकी स्पीड सुपरसोनिक होती है। नासा के मुताबिक इसकी स्पीड 1770 किमी प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। यह आवाज से डेढ़ गुना ज्यादा तेज है। पृथ्वी पर सिर्फ पवन सुरंगों में ही हाइपरसोनिक स्पीड तक पहुंच सकती हैं। नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर के 10 गुणा10 सुपरसोनिक पवन सुरंग में 4,321 किमी प्रति घंटे की स्पीड से बहती है। वहीं पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से सबसे तेज हवाओं के झोके की बात करें तो इसका 407 किमी प्रति घंटे का रिकॉर्ड है। 10 अप्रैल 1996 को ऑस्ट्रेलिया के बैरो द्वीप पर एक चक्रवात के दौरान इसे दर्ज किया गया था। तूफानों की बात करें तो हमारे सौरमंडल में बृहस्पति ग्रह ऐसा है जहां हर पल तूफान चल रहा होता है। इसके कई रहस्यमय तूफान हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध ‘द ग्रेट रेड स्पॉट’ है। बृहस्पति की तस्वीरों को जब आप देखेंगे तो इसमें एक लाल रंग का बड़ा धब्बा दिखाई देता है। यह कोई आम धब्बा नहीं बल्कि एक विशालकाय तूफान है, जो पिछले कई सौ वर्षों से चल रहा है। तूफान कितना बड़ा है उसका अंदाजा आप इसी से लगा लीजिए कि पृथ्वी जैसे दो ग्रह इसमें समा जाएंगे। तूफान का आकार 16,000 किमी चौड़ा है और इसकी हवाओं की स्पीड 640 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। बृहस्पति पर तूफानों का निर्माण ग्रह के तेज घूर्णन और आंतरिक उष्मा के कारण होता है। बृहस्पति का एक दिन सिर्फ 10 घंटे का होता है, जिसके कारण इसके वायुमंडल में तेज हवाएं पैदा होती हैं। विभिन्न दिशाओं में ये हवाएं बहती हैं और आपस में टकराकर शक्तिशाली तूफान पैदा करती हैं। नासा के मुताबिक रेड स्पॉट तूफान का लंबा जीवनकाल इस तथ्य से जुड़ा हो सकता है कि बृहस्पति मुख्य रूप से एक गैसीय ग्रह है। लाल धब्बा नाटकीय रूप से अपना आकार और रंग बदलता है।
