
नई दिल्ली। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही वाशिंगटन डीसी में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया को लेकर बनाए गए चतुष्कोणीय क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की पहली महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें समूह ने एकजुटता के साथ चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र (आईपीआर) में बलपूर्वक या जबरदस्ती यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का सख्त लहजे में विरोध करेंगे। यह जानकारी बुधवार को विदेश मंत्रालय द्वारा इस बैठक के बाद जारी किए गए संयुक्त बयान से मिली है। बैठक में क्वाड विदेश मंत्रियों ने एक खुले हुए, स्वतंत्र आईपीआर को मजबूती प्रदान की साझा प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, ये एक ऐसा क्षेत्र है जहां कानून का शासन, लोकतांत्रिक मूल्य, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को समर्थन के साथ उसकी रक्षा की जाती है। साथ ही इस साल के अंत तक भारत में क्वाड शिखर सम्मेलन के आयोजन की सभी ने पुष्टि की और कहा कि इसकी तैयारियों को लेकर हम सभी नियमित आधार पर एक साथ मुलाकात करेंगे। क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत का दौरा कर सकते हैं। मालूम हो कि विदेश मंत्री एस.जयशंकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के रूप में बीते सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को पीएम मोदी का लिखा हुआ एक विशेष पत्र भी सौंपा था। चारों की विदेश नीति में क्वाड अहम: जयशंकर विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में क्वाड की बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन के उद्घाटन के कुछ घंटों के भीतर हुई विदेश मंत्रियों की यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है। जो इस बात को रेखांकित करती है कि सदस्य देशों की विदेश नीति में क्वाड की प्राथमिकता क्या है? बैठक में हमारी व्यापक चर्चाओं में स्वतंत्र, खुले, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई। साथ ही बड़े स्तर पर सोचने, एजेंडे को गहन बनाने तथा हमारे सहयोग को तीव्र करने के महत्व पर चर्चा की गई। जयशंकर ने पोस्ट में चीन का नाम लिए बगैर कहा कि क्वाड की बैठक से यह स्पष्ट संदेश गया है कि अनिश्चित और अस्थिर विश्व में क्वाड वैश्विक भलाई के लिए एक ताकत बना रहेगा। विदेश मंत्री ने बैठक की मेजबानी करने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भागीदारी के लिए ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री इवाया ताकेशी को धन्यवाद दिया।
