विदेश गये भोपाल के कई लोग फंसे है, सायबर ठग गिरोहो के जाल में – आकर्षक जॉब का ऑफर देकर बुलाने के बाद कराई जा रही है सायबर गुलामी – पुलिस खंगाल रही है कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम गये भोपाल के 40 लोगों की जानकारी
भोपाल(ईएमएस)। विदेशो में नौकरी करने का सपना देखने वाले बेरोजगारो को उनके प्रोफाइल के मुताबिक ही भारी सैलरी पर मनपंसद नौकरी देने का झांसा देकर बुलाने के बाद उन्हें सायबर ठगी के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है। विदेश बुलाकर उन्हें मजबूर करते हुए साइबर अपराध में इस्तेमाल किये जा रहे ऐसे लोगों की बढ़ती संख्या की रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित पैनल ने राज्य सरकारों के साथ इसका डेटा साझा करते हुए आवश्यक जानकारी मांगी है। रिर्पोट में यह बात सामने आई है कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कई भारतीयों को मनपंसद नौकरी के ऑफर का लालच देकर बुलाया गया। कई मामलों में जॉब के लिये बुलाने वाले उनके एम्पलॉयर ने उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त करते हुए उन्हें धमकाकर मजबूर करते हुए उनका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी में किया गया। साइबर क्राइम सेल ने भोपाल के 19 थानों को शहर में रहने वाले 40 ऐसे लोगों की जानकारी के उनके परिवार के सदस्यों से संपर्क कर वेरीफाई करने के लिये भेजी है, जो जिन्होंने 2022 और मई 2024 के बीच विजिटर वीजा पर कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम गये हुए है, लेकिन अभी तक वापस नहीं आए हैं। इनमें भोपाल के अयोध्या नगर, पिपलानी, कमला नगर, कोह-ए-फिजा, गोविंदपुरा, ऐशबाग, जहांगीराबाद, कोलार, मिसरोद और शाहजहांनाबाद थाना इलाको के रहने वाले व्यक्ति शामिल हैं। आशंका है कि इन लोगों को मजबूर करते हुए साइबर ठगी करने वाले गिरोह में इस्तेमाल किया जा रहा है। – इमिग्रेशन ब्यूरो ने जमा किया था 29 हजार से अधिक भारतीयों का डेटा जानकारी के अनुसार पिछले साल इमिग्रेशन ब्यूरो ने ऐसे 29 हजार से अधिक भारतीयों का डेटा संकलित किया था, जिन्होंने 2022 और मई 2024 के बीच दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों- कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार और वियतनाम की यात्रा की थी, लेकिन अभी तक वापस नहीं आए हैं। 39 साल से कम उम्र के यह इन लोगो में से अधिकतर पंजाब, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, केरल, दिल्ली, गुजरात और अन्य जगहों से थे, और कम संख्या के लोग मध्य प्रदेश के रहने वाले है। – डिजिटल अरेस्ट, क्रिप्टो करेंसी, ऑनलाइन गेमिंग, शेयर ट्रेडिंग घोटालों के लिये करते है इस्तेमाल विदेश पहुंचकर जाल में फंसे मजबूर भारीतीयो का इस्तेमाल ठग गिरोह के सरगना भारतीयों को ही डिजिटल अरेस्ट, क्रिप्टो करेंसी, ऑनलाइन गेमिंग और शेयर ट्रेडिंग घोटालों जैसै मामलो में फंसाने के लिये करते है। इन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल बनाने के लिए मजबूर किया गया। पिछले साल इन देशों में भारतीय दूतावासों द्वारा ऐसे कई व्यक्तियों को बचाया गया था। साइबर अपराधों के अधिकांश मामलों की जांच में यह बात सामने आई है की ऐसे गिरोह के मेन स्टेशन दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में थे। -भोपाल से विदेश गये लोगो के परिवार वालो से संपर्क कर रही पुलिस साइबर क्राइम सेल के अधिकारियों के अनुसार पुलिस टीमें कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम गये लोगों के घरो पर जाकर उनके परिवार वालो से इस बात की जानकारी जुटा रही है कि वह इन देशों में कितने समय से और किस उद्देश्य से रह रहे है, क्या विदेश गये लोग परिवार वालो के नियमित संपर्क में है, या उन्हें किसी ठगी का संदेह है। साथ ही, उनकी उम्र, शैक्षणिक योग्यता और अन्य जानकारियां भी जुटाई जा रही हैं। हालांकि अधिकारियों को यह भी आंशका है कि जाल में फंसे लोगो को उनके एम्पलॉयर ने उनके परिवार वालो को गलत जानकारी देने के लिये भी मजबूर किया होगा। अफसरो के अनुसार जुटाई गई जानकारी के आधार पर पता लगाया जाएगा कि वे साइबर गुलामी में फंसे हैं, या नहीं।