
नई दिल्ली,। मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन के खिलाफ कोर्ट में एनआईए का पक्ष रखने की जिम्मेदारी सीनियर एडवोकेट और क्रिमिनल मामलों के एक्सपर्ट दयान कृष्णन केंद्रीय जांच एजेंसी की तरफ से पक्ष रखेंगे। बता दें कि दयान कृष्णन इससे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल और चर्चित मामलों में वकील रह चुके हैं। दयान कृष्णन निर्भया मामले में भी प्रॉसीक्यूशन पक्ष से दलीलें रखी थीं, जिसके बाद अभियुक्तों को अंजाम तक पहुंचाया गया था। 2012 में दयान कृष्णन को निर्भया गैंगरेप-मर्डर मामले में मुकदमे के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया गया था। दयान ने इस मामले में वकीलों की टीम का नेतृत्व करने के लिए स्वेच्छा से निशुल्क काम किया था। दयान कृष्णन ने निर्भया मामले में आरोपियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद कहा था, ‘घटना के बाद मुझे लगा कि समाज के प्रति मेरा कर्तव्य है। जब मैं समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाऊंगा, तो निश्चित रूप से मैं पैसा नहीं कमा पाऊंगा।’ वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन 26/11 के सह-साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली के प्रत्यर्पण में कानूनी प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे थे। अब वही एनआईए की अभियोजन टीम का नेतृत्व करेंगे जो तहव्वुर राणा के खिलाफ एक मजबूत मामला बनाएगी। सूत्रों ने बताया कि कृष्णन को विशेष अभियोजक नरेंद्र मान सहित एक टीम द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी, जिन्होंने पहले दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई का प्रतिनिधित्व किया था। बता दें कि मान एक अनुभवी क्रिमिनल वकील हैं। सूत्रों ने बताया कि दयान कृष्णन ने राणा के प्रत्यर्पण की कार्यवाही में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी टीम ने अमेरिकी कोर्ट के समक्ष जबरदस्त साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके चलते राणा की सभी दलीलों और अपीलों को खारिज कर दिया गया। साल 2019-20 में प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू होने पर कृष्णन एनआईए के साथ मिलकर काम कर रहे थे। वह और उनकी टीम भारत का मामला पेश करने के लिए एनआईए के साथ अमेरिका भी गए थे। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी कानूनों के कारण अनौपचारिक क्षमता में टीम की सहायता कर रहे थे। एनआईए के एक अधिकारी ने कहा, उन्होंने अपराधों को अलग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, ताकि यह स्थापित किया जा सके कि भारत का मामला अमेरिका द्वारा राणा पर चलाए गए मुकदमे से अलग है।
