
मुंबई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवी मुंबई इस्कॉन के श्री श्री राधा मदनमोहनजी मंदिर का बुधवार को उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमें यदि भारत को समझना है, तो पहले आध्यात्म को आत्मसात करना होता है। पीएम मोदी ने यहां कहा कि जिस प्रकार इस्कॉन सेवा भाव से काम कर रही, मुझे संतोष है कि हमारी सरकार भी इसी सेवा-भाव के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मंदिर में अध्यात्म और सभी परंपराओं के दर्शन होते हैं। जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यहां रामायण, महाभारत का म्यूजियम बनाया जा रहा और वृन्दावन के 12 जंगलों का प्रतिरूप भी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में प्रभुपाद जी स्वामी का अलग ही स्थान है। जब सबसे बड़ी गीता संस्करण लोकार्पण के समय मुझे बुलाया गया था, तब उसका फल मुझे मिला। पीएम मोदी ने कहा कि आज इस अवसर पर परम श्रद्धेय गोपालकृष्ण गोस्वामी महाराज का मुझे भावुक स्मरण हो आया है। इस प्रोजेक्ट के साथ उनका विजन भी जुड़ा हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अगाध भक्ति का आशीर्वाद भी इससे जुड़ा है। आज इस वक्त भले ही वो भौतिक तौर पर सशरीर यहां नहीं हैं, लेकिन उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति हम सब महसूस कर रहे हैं। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा, कि विश्व में फैले इस्कॉन अनुयायी भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति रुपी डोर से बंधे हुए हैं। वहीं उन्होंने कहा कि भारत महज भौगोलिक सीमाओं में बंधा भूमि का टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत एक जीवंत भूमि का नाम है, जहां एक जीवंत संस्कृति है। इस संस्कृति की भी एक चेतना है, जिसे आध्यात्म कहते हैं! इसलिए, यदि भारत को समझना है, तो हमें पहले आध्यात्म को आत्मसात करना होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस दुनिया को महज भौतिक दृष्टि से देखते हैं, उन्हें भारत भी अलग-अलग भाषा और प्रांतों का समूह नजर आता है, लेकिन जब आप इस सांस्कृतिक चेतना से अपनी-अपनी आत्मा को जोड़ते हैं, तब आपको भारत के विराट स्वरूप के दर्शन होते हैं।
