
बीजिंग । अमेरिका अपने तुगलगी आदेशों के चलते पूरी दुनिया को हिलाए हुए है। डर के कारण कई देशों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जबकि चीन ने साफ कर दिया कि यदि अमेरिका युद्ध चाहते हैं तो हम अंतिम सांस तक लड़ने को तैयार हैं। इसके पीछे चीन की ताकत भी है।चीन का अपना रक्षा बजट बढ़कर 245 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी चीन की सैन्य ताकत को स्थल, वायु, समुद्र, परमाणु, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में तेज़ी से मजबूत करने के लिए की गई है। चीन का सैन्य खर्च भारत के 79 अरब डॉलर के रक्षा बजट से तीन गुना अधिक है और यह अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है। अमेरिका इस साल 900 अरब डॉलर से अधिक अपनी सेना पर खर्च करेगा। चीन का यह कदम ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही उसने अमेरिका को चेतावनी दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर दोगुना टैरिफ लगाने का ऐलान किया तो मानो इससे ड्रैगन को आग ही लग गई। चीन ने पहले अमेरिका को दो टूक कहा कि अगर अमेरिका जंग चाहता है तो वह भी अंत तक लड़ने के लिए तैयार है। वैसे यह भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि चीन की सैन्य और आर्थिक नीतियों का सीधा असर भारत की सुरक्षा, व्यापार और कूटनीति पर पड़ता है। चीन की ट्रेड वॉर पर चेतावनी और फिर रक्षा बजट में बढ़ोतरी से यह साफ संकेत मिलता है कि जिनपिंग, अमेरिका को यह बताना चाहते हैं कि वह सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि सैन्य ताकत के मामले में भी मुकाबले के लिए तैयार हैं। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, ‘भारत को अपनी रक्षा बजट को 2.5 प्रतिशत जीडीपी तक बढ़ाना चाहिए, जो फिलहाल सिर्फ 1.9 प्रतिशत है, ताकि चीन और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ एक विश्वसनीय प्रतिरोध क्षमता विकसित की जा सके। भारत की 14 लाख से अधिक सैनिकों वाली सेना के लिए वेतन और पेंशन पर भारी खर्च होता है। इसके कारण, रक्षा बजट का केवल 25 प्रतिशत ही सैन्य आधुनिकीकरण के लिए बचता है, जिससे कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर भारत को कमी झेलनी पड़ती है। इनमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां, हेलीकॉप्टर, उन्नत वायु रक्षा मिसाइलें, टैंक-रोधी मिसाइलें और नाइट-फाइटिंग क्षमताएं शामिल हैं।
