
दुबई । भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा चैम्पियंस ट्रॉफी में अब तक बड़ स्कोर नहीं बना पाये हैं। ऐेसे में पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि रोहित को पावरप्ले में आक्रामक बल्लेबाज की जगह पर लंबी पारी खेलनी चाहिये। वहीं कोच गौतम गंभीर ने रोहित के आक्रामक रवैये का बचाव किया है। गंभीर ने कहा कि हम औसत या रन नहीं देखते, बल्कि इंटेंट देखते हैं जबकि गावस्कर का मानना है कि भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में है और हर किसी को रोहित से एक बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी। गंभीर ने सेमीफाइनल के बाद कहा था कि ड्रेसिंग रूम रोहित को आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि शीर्ष पर अपनी धमाकेदार शुरुआत से पैदा होने वाले इम्पैक्ट के आधार पर आंकता है। दूसरी ओर गावस्कर ने कहा कि रोहित को अपने रवैये पर फिर विचार करना चाहिए, उन्होंने कहा कि कप्तान के पास अकेले ही मैच को प्रभावित करने की क्षमता है। ऐसे में अगर वह 20 से 25 ओवर तक बल्लेबाजी करते हैं तो अकेले ही मैच बदल सकते हैं। चैंपियंस ट्रॉफी के 4 मैचों में 104 रन 100 के आसपास के स्ट्राइक रेट से बनाने वाले रोहित ने अब तक इस टूर्नामेंट में एक बार 41 रन बनाये हैं अन्य मैचों में उनका स्कोर और कम है। हालांकि, एक बात जरूर है कि वे जिस मैच में तेज शुरुआत देते हैं, उसका लाभ मध्य क्रम को मिलता है। भारतीय टीम को रोहित के इस आक्रामक रवैये का लाभ विश्व कप कप 2023 और टी20 विश्व कप 2024 में मिला। ये लगातार तीसरा टूर्नामेंट है, जहां वे आक्रामक क्रिकेट खेल रहे हैं। गावस्कर ने कहा, पिछले दो सालों से वह इसी दृष्टिकोण को अपना रहे हैं। इसकी शुरुआत भारत में विश्व कप के दौरान हुई थी और वह इसी फॉर्मूले पर टिके हुए हैं। उन्हें कुछ सफलता मिली है, हालांकि शायद उतनी नहीं जितनी उनकी प्रतिभा को मिलनी चाहिए। वह एक अविश्वसनीय रूप से प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, जिनके पास ऐसे शॉट हैं जो खेल में बहुत कम लोगों के पास हैं। उन्होंने आगे कहा, इसे दर्शकों को खुश करने के दृष्टिकोण से देखिए। मैं टीम के दृष्टिकोण से नहीं बोल रहा हूं। अगर वह 25 ओवर भी बल्लेबाजी करते हैं, तो भारत 180-200 के आसपास होगा। कल्पना करें कि अगर उन्होंने तब तक बल्लेबाजी की और केवल दो विकेट खोए हैं; जरा सोचें कि वे क्या कर सकते हैं। वे 350 या उससे अधिक तक पहुंच सकते हैं।
