
-विदेशी निवेशक अब निवेश करने से कतरा रहे, महंगाई व बेरोजगारी चरम पर
ढाका,। बांग्लादेश भी अब कंगाली की तरफ बढ़ रहा है। मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश में आर्थिक संकट बढ़ता ही जा रहा है। यूनुस की गलत नीतियों के कारण देश की जनता त्रस्त है। यूनुस को कुछ समझ नहीं आ रहा कि बांग्लादेश को आर्थिक संकट से कैसे उबारा जाए। बांग्लादेश की जनता को खाने के लाले पढ़ रहे हैं। यूनुस अपने ही फैसलों में फंस गए हैं। विदेशी निवेशक अब बांग्लादेश में निवेश करने से कतरा रहे हैं। खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। बेरोजगारी चरम पर है। मोहम्मद यूनुस से बांग्लादेश संभला नहीं जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों का कहना है कि स्विट्जरलैंड ने भी बांग्लादेश को पैसा देना बंद कर दिया है। पिछले छह महीनों में विदेशी निवेश में 71 फीसदी की भारी गिरावट आई है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 10.72 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि बाकी चीजों की महंगाई दर 9.32 फीसदी है। बांग्लादेश सरकार ने नोट छापना बंद कर दिया है। इसके कारण बाजार में नकदी का संकट पैदा हो गया है। लोगों के पास पैसे नहीं हैं। रोजगार नहीं हैं। मोहम्मद यूनुस के पास इससे उबरने की कोई योजना नहीं है। अब यूनुस सरकार के खिलाफ बांग्लादेश में आवाजें उठने लगी हैं। खुद आर्मी चीफ भी सरकार को चेता चुके हैं। उधर, मोहम्मद यूनुस की एक और मुसीबत बढ़ गई है। बांग्लादेश में छात्रों द्वारा नई राजनीतिक पार्टी बना ली गई है जिसका नाम जतिया नागोरिक पार्टी (जेएनपी) ने मंगलवार को देश के लिए नए संविधान की मांग की है। पार्टी के संयोजक, मोहम्मद नाहिद इस्लाम ने कहा कि पुराने संविधान और शासन ढांचे के साथ एक नए बांग्लादेश का निर्माण संभव नहीं है। इस्लाम ने कहा कि सिर्फ सरकार बदलने से कुछ नहीं होगा। लोगों के कल्याण और सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए, शासन संरचना और संविधान में सुधार करना जरुरी है। इससे ही न्याय, समानता और लोकतंत्र सुनिश्चित कर पाएंगे।
