
– अमित शाह की मौजूदगी से शुरू हुआ था विवाद – कर्नाटक कांग्रेस में गहराये मतभेद
बेंगलुरु । कर्नाटक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पार्टी के अन्य नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में शिवकुमार के ईशा फाउंडेशन के महाशिवरात्रि कार्यक्रम में जाने को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी बहस छिड़ गई है। गौरतलब है की 26 फरवरी को कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन की ओर से महाशिवरात्रि समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। शिवकुमार की इस कार्यक्रम में उपस्थिति पर AICC के सचिव पीवी मोहन ने सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, शिवकुमार उस व्यक्ति के निमंत्रण पर गए, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मजाक उड़ाता है। उनका इशारा ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव की ओर था। इस आलोचना का जवाब देते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, मैं एक हिंदू हूं। मैं हिंदू के रूप में पैदा हुआ और हिंदू के रूप में मरूंगा, लेकिन मैं सभी धर्मों से प्यार करता हूं और उनका सम्मान करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि वे महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस कार्यक्रम में गए थे, राजनीति करने के लिए नहीं। इस मुद्दे ने कांग्रेस पार्टी के अंदर मौजूद विभाजन को उजागर कर दिया है। कुछ नेता शिवकुमार के इस कदम को निजी आस्था का मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी लाइन के खिलाफ मान रहे हैं। कांग्रेस की राज्य इकाई पहले भी हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर दो गुटों में बंटी रही है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान की खबरें आती रही हैं। शिवकुमार के इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वे राज्य में हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद जल्द थमने वाला नहीं है। कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद राज्य में सत्ता संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में पार्टी आलाकमान इस मुद्दे पर डीके शिवकुमार और अन्य नेताओं को तलब कर सकता है। -भाजपा ने साधा निशाना शिवकुमार के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हिंदू आस्था का अपमान करती है और उनके ही नेताओं को कटघरे में खड़ा करती है। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि कांग्रेस के अंदर हिंदू विरोधी मानसिकता हावी है।
