
नई दिल्ली, । महाकुंभ में बीते 45 दिनों से करोड़ों लोगों के साथ आध्यात्मिक हस्तियों का जमावड़ा रहा, जिनमें से कुछ लोग काफी चर्चा में रहे, लेकिन कई ऐसे लोग थे जो चर्चाओं से परे साधना में रहे। ऐसा ही एक नाम साध्वी भगवती सरस्वती का है। वह परमार्थ निकेतन आश्रम से जुड़ी हैं वह महाकुंभ पहुंची थी। वह भारतीय जीवनशैली शांति, संतुलन और सादगी का प्रतीक है। साध्वी भगवती सरस्ती की कहानी भी दिलचस्प है। अमेरिका में पैदा हुईं साध्वी भगवती का ताल्लुक यहूदी परिवार से था। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट करने वालीं साध्वी सरस्वती 1996 में भारत आई थीं और फिर यहीं बस गईं। उन्होंने अपनी पुस्तक हॉलीवुड टू हिमालयाज में लिखा है कि कैसे उन्हें बचपन में यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और खाने तक की व्यवस्था खराब थी। उनकी शादी भी हो गई थी, लेकिन वह पति से तलाक लेकर आध्यात्म और सत्य की खोज में भारत आ गईं। उन्होंने स्वामी चिदानंद सरस्वती से दीक्षा ली है और अब वह परमार्थ निकेतन आश्रम की सदस्य हैं। वह अपना ज्यादातर समय ऋषिकेश में बिताती हैं और समाजसेवा की गतिविधियों से जुड़ी रहती हैं। वह इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिंदुत्व की रचना करने वाली टीम का हिस्सा हैं, जिसे 11 वॉल्यूम में लिखा गया था। वह लॉस एंजिलिस की रहने वाली हैं और साइकोलॉजी में पीएचडी तक की पढ़ाई कर चुकी हैं, लेकिन एक शानदार करियर छोड़कर उन्होंने आध्यात्म की राह अपना ली। उनकी योग साधना में भी गहरी रुचि है। वह कई स्कूलों और वोकेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाने वाली संस्था डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की प्रेसिडेंट हैं। उन्होंने वर्ल्ड बैंक और संयुक्त राष्ट्र संघ के भी कई अभियानों में हिस्सा लिया है।
