
कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सियासी अफवाहों पर लगाया ब्रेक
बेंगलुरु,। कांग्रेस का दफ्तर मेरा मंदिर है। मैं जन्मजात से कांग्रेसी हूं…मेरी व्यक्तिगत मान्यताएं नहीं बदली हैं। मैं हिंदू ही पैदा हुआ और हिंदू ही मरूंगा। यह कहना है कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक चल रहे सियासी अफवाहों पर ब्रेक लगाने की कोशिश की। ये अफवाहें जैसे कि डीके शिवकुमार कर्नाटक का सीएम बनने के लिए आलाकमान पर दबाव डाल रहे हैं, बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं आदि। इस दौरान शिवकुमार ने महाकुंभ को लेकर कहा कि सद्गुरु जग्गी वासुदेव के आश्रम की यात्रा और हिंदुत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वे जन्मजात कांग्रेसी हैं और बीजेपी के करीब होने की खबरें बकवास और बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि मैं एक कांग्रेसी के रूप में पैदा हुआ हूं मेरी व्यक्तिगत मान्यताएं वही हैं, लेकिन एक गलत कहानी फैलाई जा रही है कि मैं बीजेपी के करीब जा रहा हूं। शिवकुमार ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल से अनुरोध किया है कि वे उन्हें केपीसीसी अध्यक्ष पद पर बने रहने दें। उन्होंने कहा कि यह झूठ है, ये मनगढ़ंत खबरें हैं। ऐसी कई कहानियां गढ़ी जा रही हैं। धार्मिक हस्तियों के साथ अपने जुड़ाव को लेकर उठे विवाद का जिक्र करते हुए डीके ने कहा कि सद्गुरु मेरे घर आए और मुझे ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम में आमंत्रित किया। वह मैसूर से हैं और मैं उनकी बुद्धिमत्ता का सम्मान करता हूं। पिछले साल मेरी बेटी उनके कार्यक्रम में शामिल हुई थी। इस बार उन्होंने मुझे और मेरे परिवार को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया है। इस वजह से सोशल मीडिया पर झूठे दावे किए जा रहे हैं कि मेरा झुकाव बीजेपी की ओर है। महाकुंभ मेले और ईशा फाउंडेशन को शिवकुमार ने कहा कि मैं हिंदू के रूप में पैदा हुआ था और हिंदू के रूप में ही मरूंगा। मैं सभी धर्मों से प्यार करता हूं और उनका सम्मान करता हूं। मैं दरगाह और चर्च भी जाता हूं। हर समुदाय मुझे गले लगाता है। महाकुंभ को लेकर उन्होंने कहा कि यह अविश्वसनीय था। इतनी बड़ी भीड़ को संभालना आसान काम नहीं है। कुछ छोटी-मोटी असुविधाएं तो होंगी ही, लेकिन मैं यहां खामियां निकालने नहीं आया हूं। आस्था के मामले में, यह भगवान के साथ एक भक्त के रिश्ते की बात है, कुछ लोग सीधे जुड़ते हैं, जबकि अन्य पुजारियों के माध्यम से जुड़ते हैं।
