
नई दिल्ली। 19 फरवरी से शुरू होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी में विराट कोहली अपना जलवा बिखरने को तैयार हैं। कोहती बीते कई महीने से रन के लिए तरस रहे है। चंद रोज पहले इंग्लैंड के खिलाफ अहमदाबाद में हुए आखिरी वनडे में उन्होंने जो अर्धशतक लगाया, उससे उनका आत्मविश्वास जरुर वापस आया होगा। 55 गेंद में 52 रन की पारी में कोहली ने सात चौके और एक छक्का भी जड़ा था। अपने करियर के आखिरी पड़ाव में पहुंच चुके कोहली 2013 में धोनी की चैंपियंस ट्रॉफी चैंपियन टीम का भी हिस्सा थे। वनडे इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में कोहली तीसरे नंबर पर आते हैं। 297 मैच में उनके नाम 57.93 की औसत से 13,963 रन हैं। सिर्फ सचिन तेंदुलकर (463 मैच में 18,426 रन) और कुमार संगाकारा (404 मैच में 14.234 रन) बनाकर कोहली से आगे हैं। कोहली और तेंदुलकर की अक्सर तुलना भी होती रही है। कोहली ने अपने पूरे करियर में चैंपियंस ट्रॉफी के कुल 13 मैच खेल चुके हैं। जहां 12 पारियों में उन्होंने 92.32 की स्ट्राइक रेट से 529 रन बनाए। छह बार वह नॉट आउट रहे। एक बार वे वह बिना खाता खोले भी आउट हो चुके हैं। 529 रन में से 124 रन उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ बनाए हैं, इन पारियों में विराट का औसत 62 और स्ट्राइक रेट 96.87 का रहा है। वहीं सचिन तेंदुलकर ने चैंपियंस ट्रॉफी में कुल 16 मैच खेले हैं, इसमें उन्हें 14 बार बल्लेबाजी का मौका मिला। इन 14 पारियों में तेंदुलकर ने 36.75 की औसत और 78.75 की स्ट्राइक रेट से 441 रन बनाए हैं। दो मौकों पर सचिन नॉटआउट लौटे हैं। कोहली से सचिन के रिकॉर्ड की तुलना करने पर ये चीज भी माननी पड़ेगी कि तेंदुलकर ने अपने करियर में कहीं बेहतर गेंदबाजों का सामना किया है। टूर्नामेंट के इन 441 रन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 63 की औसत से 189 रन भी आए हैं। कोहली ने चैंपियंस ट्रॉफी में पांच अर्धशतक लगाए हैं, लेकिन एक भी सेंचुरी नहीं ठोक सके। उनका बेस्ट स्कोर नाबाद 96 रन रहा है, जो 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ बर्मिंघम में बनाया था। जबकि सचिन तेंदुलकर के नाम एक शतक है। 14 पारियों में तेंदुलकर ने दो अर्धशतक बनाए हैं। सचिन का शतक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1998 में बांग्लादेश की मेजबानी में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी में आया था। सचिन ने तब 128 गेंदों में 141 रन की तूफानी पारी खेली थी।
