
नई दिल्ली, महाराष्ट्र के किसानों के लिए मोदी सरकार की योजना किसी वरदान से कम नहीं है। पर्यावरण में आ रहे बदलाव की वजह से जहां फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिसकी भरपाई सरकार उन फसलों की बीमा के जरिये करती है। साल 2023 से महाराष्ट्र में किसानों को केवल 1 रुपये का प्रीमियम देना पड़ता है। इससे राज्य में बीमित क्षेत्र में वृद्धि हुई है। पहले प्रीमियम ज्यादा था, लेकिन प्रीमियम कम होने के तुरंत बाद किसानों द्वारा बीमा लेने में सबसे बड़ी वृद्धि हुई। दूसरी ओर, किसानों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, जिसने बारिश में अधिक अनिश्चितता लाई है और अत्यधिक बारिश को एक सामान्य घटना बना दिया है। इस स्थिति ने भी फसल बीमा योजना की स्वीकृति को बढ़ावा दिया है। महाराष्ट्र के रहने वाले किसान श्रेयस तुकाराम ने अपनी पांच एकड़ प्याज की फसल का बीमा कराया था। नवंबर में राज्य में हुए चुनावों से ठीक पहले उन्हें फसल नुकसान के लिए 60,000 रुपये का मुआवजा मिला। उनका कहना है कि इस तरह फसलों का बीमा कराने का दांव सफल रहा है। श्रेयस के अनुसार, पिछले साल अप्रैल में असमय बारिश ने मेरी तैयार फसल को बर्बाद कर दिया। वैसे देखा जाए तो यह नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं था, लेकिन यह बुवाई की लागत को पूरा करने के लिए काफी था। असमय बारिश और कीटों के बढ़ते प्रकोप के साथ फसल बीमा हमारे जैसे प्याज किसानों के लिए एक अच्छा सुरक्षा कवच है। उन्होंने कहा कि हमारे इलाके में अधिक से अधिक किसान फसल बीमा ले रहे हैं। प्रीमियम सिर्फ 1 रुपये है और मेरे अनुभव के अनुसार, मुआवजा भी ठीक-ठाक मिलता है। महाराष्ट्र के नायगांव के रहने वाले एक और किसान एकनाथ शिंदे ने कहा कि फसल नुकसान के लिए बीमा कवर एक अच्छा सहारा है। धीरे-धीरे किसान इसे अपना रहे हैं। राज्य कृषि विभाग ने भी देखा है कि प्याज किसानों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपने खेतों का बीमा करवा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में महाराष्ट्र में 7.43 लाख हेक्टेयर से अधिक प्याज की फसल का बीमा किया गया। पांच साल पहले, 2019-20 में, यह संख्या केवल 45,000 हेक्टेयर थी।
