
वाराणसी, प्रयागराज महाकुंभ-25 में मौनी अमावस्या के दिन अनियंत्रित भीड़ में 13 से 17 लोगों की भगदड़ में दबकर मौत हो गई है, और सैकड़ो श्रद्धालुओं के घायल होने की आशंका है। बताया जा रहा है की अखाड़ो के शाही स्नान एवं वी आई पी स्नान के लिए रास्ता सुरक्षित रखने के हेतु संगम को जोड़ने वाले पांटून पुलों को 28 जनवरी की रात्रि को ही आवागमन हेतु बंद कर दिया था, परिणामस्वरुप भीड़ का प्रेसर असंभावित बढ़ता गया और ये घटना घटी। रात 2 बजे हुई इस घटना के कारण अखाड़ों नें अपना शाही स्नान रद्द कर दिया है,लेकिन कुछ लोगो का कहना है कि मेला प्रशासन नें ही इस दुखद घटना के कारण शाही स्नान न करनें को अखाड़ों से निवेदन किया है। अब अखाड़े जहाँ हैं वहीँ संत समाज स्नान करेगा। लेकिन हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार महाकुम्भ में मौनी अमावश्या को सबसे बड़ा स्नान पर्व माना जाता है, और अखाड़ों का संगम में स्नान न कर पाना एक बड़े पुण्य से वंचित होना माना जायेगा। संत समाज पिछले लगभग डेढ़ माह से गंगा -यमुना और संगम तट पर डेरा डालकर इस मौनी अमावस्या का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा था, लेकिन अप्रत्याशीत भीड़ नें संत समाज के उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
